tumhaari raza men hamaari raza hai tumhein ye pata hai | तुम्हारी रज़ा में हमारी रज़ा है तुम्हें ये पता है

  - Sohil Barelvi

तुम्हारी रज़ा में हमारी रज़ा है तुम्हें ये पता है
तुम्हारा ख़ुदा ही हमारा ख़ुदा है तुम्हें ये पता है

जो गुज़रा था हम पे कभी हादसा वो जिगर में छुपा था
वही हादसा अब उभरने लगा है तुम्हें ये पता है

कि जिस के सबब हीर रांझा ज़माने के दुश्मन बने थे
उसी 'इश्क़ का भूत तुम पर चढ़ा है तुम्हें ये पता है

फ़क़त एक हम ही जहाँ से अलग हो के ज़िंदा नहीं हैं
तुम्हें भी जहाँ से छुपा के रखा है तुम्हें ये पता है

तुम्हारी तरफ़ शाम होते ही अब तो क़दम चल पड़े हैं
तुम्हारी निगाहों में इक मय-कदा है तुम्हें ये पता है

तुम्हें लग रहा है तुम्हारे सितम पर नज़र ही नहीं है
मुसलसल ख़ुदा भी तुम्हें देखता है तुम्हें ये पता है

पुराने ख़यालों को 'सोहिल' रफ़ू कर रहे हो फ़क़त तुम
जो तुम ने लिखा है वो सब लिख चुका है तुम्हें ये पता है

  - Sohil Barelvi

Duniya Shayari

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