vahaañ tak aakhirsh vo le gaya tha | वहाँ तक आख़िरश वो ले गया था

  - Sohil Barelvi

वहाँ तक आख़िरश वो ले गया था
जहाँ जाने से मैं कतरा रहा था

जहाँ पर कम बहुत कम बोलना था
वहाँ पर मैं ज़ियादा बोलता था

तुझे तो याद होगा क्या बताऊँ
तेरी महफ़िल से क्यूँँ उठ कर गया था

सभी ख़तरे से बाहर हो चुके थे
मुझे अपने लिए भी सोचना था

वही है ना तू हम-दम कल तलक जो
मुझे ख़ुश देख कर ख़ुश हो रहा था

पराया कर दिया उस ने भी इक दिन
मुझे जो शख़्स अपना सा लगा था

ख़िज़ाँ के दिन में वो दिन याद आए
परिंदों से हमारा राब्ता था

ये राह-ए-इश्क़ है वाक़िफ़ हूँ इस से
इसी रह पर मैं मुँह के बल गिरा था

गुज़िश्ता साल जाते जाते सोहिल
जिगर को और भारी कर गया था

  - Sohil Barelvi

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