चराग़ों को अब तक बुझाया नहीं है
तुझे जाने वाले भुलाया नहीं है
अभी मुझ में हँसने की उम्मीद है कुछ
अभी दर्द दिल में समाया नहीं है
उसे सोच कर मैं अभी से हूँ हैराँ
जो वा'दा अभी तक निभाया नहीं है
ख़ुदारा सलामत हों मेरे अज़ीज़म
कोई ख़्वाब क्यूँँ आज आया नहीं है
खुले हाथ हम ने लुटाया है सब कुछ
मोहब्बत में कुछ भी गँवाया नहीं है
तेरा दिल भी दिल है यही जान कर बस
तुझे दर्द अपना सुनाया नहीं है
हमीं लाए ख़ुद को किनारे पे सोहिल
किसी ना-ख़ुदा ने बचाया नहीं है
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