लब-ओ-रुख़सार और उन की जबीं पर शे'र कहते हैं

जहाँ जिस बज़्म में जाते वहीं पर शे'र कहते हैं

उन्हीं की याद में खो कर दिवानों सा कभी होकर
जहाँ जिस सम्त जाते हैं वहीं पर शे'र कहते हैं

दिखा महबूब की तस्वीर वो इक दिन हमें बोले
चलो मिल कर हमारी नाज़नीं पर शे'र कहते हैं

हमारी ज़िन्दगी में शे'र ग़ज़लों के सिवा क्या है
कभी माज़ी कभी जान-ए-हज़ीं पर शे'र कहते हैं

लिपट तकिए से आधी रात को रख कर वरक़ पर लब
हमेशा से मुक़द्दर की जबीं पर शे'र कहते हैं

— Dr Bhagyashree Joshi

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