मैं भी इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ औरउसे भी लौट कर वापस नहीं आनालगेगी भूख तो मैं ज़हर खा लूँगामुझे फिर से कोई धोखा नहीं खाना— ABhishek Parashar