naye sapne sajaane men zamaane beet jaate hain | नए सपने सजाने में ज़माने बीत जाते हैं

  - Haider Khan

नए सपने सजाने में ज़माने बीत जाते हैं
किसी मंज़िल को पाने में ज़माने बीत जाते हैं

जिसे दिल में बसाने में ज़रा सा वक़्त लगता है
उसे दिल से भुलाने में ज़माने बीत जाते हैं

ये दिल मजबूर होता है तो पत्थर बन ही जाता है
इसे फिर दिल बनाने में ज़माने बीत जाते है

कोई जब रूठ जाए तो उसे झट से मना लोगे
मगर ख़ुद को मनाने में ज़माने बीत जाते हैं

भरोसे का जो टूटा सा महल लेकर बिछड़ता है
उसे वापस बुलाने में ज़माने बीत जाते हैं

कोई वा'दा जो करना हो तो फिर इक पल नहीं लगता
मगर वादे निभाने में ज़माने बीत जाते हैं

  - Haider Khan

Promise Shayari

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