रोज़ जीते हैं रोज़ मरते हैं
जानते हैं जो इश्क़ करते हैं
सच कहें तुम को याद करते हैं
याद कर के ही आह भरते हैं
लोग सब हमपे नाज़ करते हैं
सोच कर हम जो पाँव धरते हैं
तुम मोहब्बत से भी नहीं डरते
डरने वाले सभी से डरते हैं
झील में चाँद जब नहाता है
तारे तब आँचलों उतरते हैं
हम को तोयेश जानते थे जो
पूछिए उन को तो मुकरते हैं
— Toyesh prakash















