उल्टी तस्वीर पहन कर निकले
अपनी तक़दीर पहन कर निकले
उस को देखा था बहुत आँखों ने
ख़्वाब ता'बीर पहन कर निकले
फ़स्ल-ए-गुल आ गई तो पाँव में
हम भी ज़ंजीर पहन कर निकले
शे'र हम ने भी बहुत लिख डाले
कैसी तश्हीर पहन कर निकले
हर तरफ़ अपनी अलम-दारी है
कैसे ये तीर पहन कर निकले
साथ देने को बहत्तर का 'उमर'
हम भी शमशीर पहन कर निकले
Read Full