aaj savere aftaab aane ke baad | आज सवेरे आफ़्ताब आने के बा'द

  - Utkarsh Musafir
आजसवेरेआफ़्ताबआनेकेबा'द
मुझेमेरेकलकेपहनेपैंटकीजेबपर
इकख़ूनसेलत-पतरूमालमिला
साथमिलीकुछसूखीहुईनज़्में
जोकलशबमैंनेलिखीथी
इनसूखीनज़्मोंकोतकिएतलेरखकर
मैंनेकलकावाक़िआ''यादकिया
कुछधुंदलीसीथीइसवाक़िएकीतस्वीरमेरेज़ेहनपर
यायूँँकहूँमैंइसवाक़िएकोसाफ़देखनानहींचाहताथा
कलशबमैंनेइसताज़ालाशकोहाथजोलगायाथा
कलशबउसलाशकेख़ूनकासुर्ख़क़तरामिरेरूमालपरजोलगाथा
कलशबकुछरक़ीबोंनेउसकाक़त्लजोकियाथा
कलशबवोबेहदअज़ीमशानदारशजरमिराथा
कलतलकजोदेताथाअपनीछाँवकाशामियाना
आजवोपड़ाथाला-वारिससावोबे-जानशजर
  - Utkarsh Musafir
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy

Rahbar Shayari

Our suggestion based on your choice

Similar Writers

our suggestion based on Utkarsh Musafir

Similar Moods

As you were reading Rahbar Shayari Shayari