आज हम नहर के किनारे हैंरोते रोते उन्हें पुकारे हैंतुम इन्हें ग़ौर से न देखो अबज़ख़्म ये सब दिए तुम्हारे हैंआप को इल्म है नहीं शायदआप के नैन कितने प्यारे हैंआप ये बात ज़ेहन में डालेआज से आप अब हमारे हैं— Vaseem 'Haidar'