शहर में जब भी धूल उड़ती है
बेबसी की ही धूल उड़ती है
साँस लेना भी भारी है अब तो
मौत की ऐसी धूल उड़ती है
अश्कों की बूँदा बाँदी से पहले
तेरी यादों की धूल उड़ती है
और कुछ भी नज़र नहीं आता
इश्क़ में इतनी धूल उड़ती है
आजकल मेरे दिल मुहल्ले में
मीर ग़ालिब की धूल उड़ती है
ताकते रह गए हम इक फ़्रेम
आईने से भी धूल उड़ती है
मेरे होंठो से सच निकलता है
सबके चेहरे की धूल उड़ती है
जब भी तेरा ख़याल आता है
दिल में हल्की सी धूल उड़ती है
बीते लम्हों की तू सबा मत भेज
सूखे फूलों की धूल उड़ती है
अपनी आँखें ही बंद रखता हूँ
शहर में इतनी धूल उड़ती है
मौत आने की है यही पहचान
जिस्म से जाँ की धूल उड़ती है
याद "कातिब" को जब वो करती हैं
चेहरे से ग़म की धूल उड़ती है















