kya ye antim waqt nahin | क्या ये अंतिम वक़्त नहीं

  - Vibhat kumar
क्यायेअंतिमवक़्तनहीं
सुब्हसुब्हसीहोतीनहीं
शामोंमेंबेचैनीरहतीहै
सिम्पटमसिम्पटमरटतेहैं
क्याहोताहैक्यानहींहोता
क्याकरनाऔरक्यानहींकरना
जीनाकैसेऔरजीतेरहना
येजीवनहैज़ब्तनहीं
क्यायेअंतिमवक़्तनहीं
पत्तेपत्तेपरहैख़तरा
फूलफूलपरमौतकीगंध
वोक़ुदरतपरलिखनेवाले
आजहैंख़ुदकमरेमेंबंद
जोमालीथेभागगए
सपनेदेकरजागगए
मुझसेेक्यापूछेहोतुम
मैंतेरेजैसाफ़र्दनहीं
क्यायेअंतिमवक़्तनहीं
किसीकोहवानहींपहुँची
किसीकोदवानहींपहुँची
किसीकोदु'आनहींपहुँची
तुमकैसेहोअच्छेहो
मैंअच्छाहूँ!परकबतक
शायदयेअंतिमवक़्तहीहै
औरबड़ासख्तभीहै
मैंतुमसेेइकबातकहूँ
"स्मृति,मैंनेतुमसेेइश्क़किया
औरकभीनहींछोड़ाइश्क़
मुश्किलसेमुश्किलवक़्तमेंभी
ख़ुदापरय़कीनकभीनहीं
तुमपरय़कीनसदाहीकिया
शायदकभीनहींकहपाऊँतुमसेे
तुमरहोपरमैंरहूँ
मैंरहूँपरतुमरहो
जान!मैंनेबसएककामसहीसेकिया
ईमानदारीयेइश्क़किया
बसइसदिनकेलिएकिलौटआओतुम
नहींआओगीमालूमहै
तुममुझअंधेकीलाठीथी
मेरेसाथरहनेकाशुक्रिया
मुझेराहदिखानेकाशुक्रिया
  - Vibhat kumar
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Diwangi Shayari

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