जहाँ की पीर ग़ज़लों में सुनाना तू मेरे शाइ'र
रवायत मीर ग़ालिब की निभाना तू मेरे शाइ'र
जहाँ पर नफ़रतें पड़ने लगें भारी मुहब्बत पर
वहाँ पर प्यार के नग़
में भी गाना तू मेरे शाइ'र
कभी जो ज़िंदगी तुझ को ग़मों की आँच पर रख दे
बिखरना मत निखर के तब दिखाना तू मेरे शाइ'र
किसी का साथ छोड़े जा रहे हों उस के अपने ही
मदद का हाथ आगे तब बढ़ाना तू मेरे शाइ'र
— Vikas Sahaj















