ha | हमें तुम मुस्कुराहट दो

  - Waheed Ahmad
हमेंतुममुस्कुराहटदो
तुम्हेंहमखिलखिलातेरोज़शबदेंगे
येकैसेहो
कितुमबौछाड़दो
तोहमतुम्हेंजल-थलदेदें
औरसहराओंकोफ़र्श-ए-आबकरदें
हमाराध्यानरखोतुम
तुम्हेंदुनियामेंरखेंगेहमअपनीआरज़ुओंकी
येकैसेहो
कितुमसोचाकरो
औरहमतुम्हारीसोचकोतज्सीमकरदें
मुरव्वजचाहतोंके
बे-लचकआईनमेंतरमीमकरदें
तुम्हेंयेभीबतातेहैं
अगरकोईख़लिशहैयाकोईइबहामहैदिलमें
तोफिरआगेनहींबढ़ना
किहमशफ़्फ़ाफ़हैं
शफ़्फ़ाफ़ियाँहीचाहतेहैं
बे-नज़रशीशोंमेंअपनेअक्सकोमैलानहींकरते
तुम्हेंयेभीबतातेहैं
अगरतुमछबदिखाकेछुपगए
तोहमतुम्हेंढूँडेंगेचाहेआपखोजाएँ
अगरतुमकहकशाँमस्कनबनाओगे
तोहमभीरौशनी-ज़ादेहैं
सूरजकेपुजारीहैं
हमऐसेसबसितारेतोड़देतेहैं
जोहमसेरौशनीकीभीकभीलेतेहैं
आँखोंमेंभीचुभतेहैं
अगरपातालमेंछुपनेकीकोशिशकी
तोफिरसीम-तन!
धरतीहमारेवास्तेसोनाउगलतीहै
भलाचाँदीकहाँइसमेंठहरतीहै
हमारीराहमें
शीशा-नुमापानीकीझीलेंमतबिछानातुम
येकंकरफेंककरहीफ़ैसलाहोगा
किउसपहनाईमेंकश्तीउतरतीहै
याफिरहमपाँवधरतेहैं
मगरऐसाकरनातुम
किहमऐसाहीकरतेहैं
  - Waheed Ahmad
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Muskurahat Shayari

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