sab ne milaaye haath yahaañ teergii ke saath | सब ने मिलाए हाथ यहाँ तीरगी के साथ

  - Waseem Barelvi

सब ने मिलाए हाथ यहाँ तीरगी के साथ
कितना बड़ा मज़ाक़ हुआ रौशनी के साथ

शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ
कीजे मुझे क़ुबूल मेरी हर कमी के साथ

तेरा ख़याल तेरी तलब तेरी आरज़ू
मैं 'उम्र भर चला हूँ किसी रौशनी के साथ

दुनिया मेरे ख़िलाफ़ खड़ी कैसे हो गई
मेरी तो दुश्मनी भी नहीं थी किसी के साथ

किस काम की रही ये दिखावे की ज़िंदगी
वादे किए किसी से गुज़ारी किसी के साथ

दुनिया को बे-वफ़ाई का इल्ज़ाम कौन दे
अपनी ही निभ सकी न बहुत दिन किसी के साथ

क़तरे वो कुछ भी पाएँ ये मुमकिन नहीं 'वसीम'
बढ़ना जो चाहते हैं समंदर-कशी के साथ

  - Waseem Barelvi

Ijazat Shayari

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