बेबसी का इक नज़ारा देखिए
कौन है क़िस्मत का मारा देखिए
इक निवाले को तरसते जो यहाँ
या ख़ुदा उन का इशारा देखिए
ज़ख़्म जो नासूर बन के रिस रहा
दर्द हरता कौन सारा देखिए
बे-ज़बाँ हैं दर्द कितने सह रहे
कौन बनता है सहारा देखिए
जो बिछौना हैं बनाए राह को
आसमाँ चादर सहारा देखिए
— Manish Kumar Gupta















