Om Bhutkar Maghloob

Om Bhutkar Maghloob

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Om Bhutkar Maghloob shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Om Bhutkar Maghloob's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
  • Nazm
मुझ को उस रस्ते पर चलना होता है
जिस पे अंधेरा ख़ूब अंधेरा होता है

साथ रहेंगे कह कर हौसला देते हैं
आख़िर उन को भी घर जाना होता है

जब आता है होश हमें क्या करना है
हाथ में उम्र का आधा हिस्सा होता है

बेगम शौहर उजड़े उजड़े लगते हैं
आख़िर किस ने किस को लूटा होता है

दिल पूना से मुंबई तक भी जाए तो
रस्ते में दिल्ली कलकत्ता होता है

वर्ज़िश करता अच्छा खाता पीता है
वो भी इक दिन मरने वाला होता है

मरने को हूँ राज़ी मेरे मरने पर
देखूँ किस का उल्लू सीधा होता है

झूट से अपनी जान बचा पाता लेकिन
दीवाना आख़िर दीवाना होता है

अव्वल अव्वल का सीधा-सादा रिश्ता
आख़िर आख़िर में पेचीदा होता है

एक ख़ुदा है एक ख़ुदा बस एक ख़ुदा
या'नी वो भी तन्हा तन्हा होता है
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Om Bhutkar Maghloob
सब को ख़ुद से बचा रहा हूँ मैं
अपना नक़्शा मिटा रहा हूँ मैं

दिल का तेरे हवा में जान-ए-जाँ
पुर्ज़ा पुर्ज़ा उड़ा रहा हूँ मैं

या सजाता हूँ तेरी डोली या
अपनी मय्यत सजा रहा हूँ मैं

ताकि फिर शे'र का धमाका हो
रोज़ बारूद खा रहा हूँ मैं

दिल के मैं ने बढ़ाए दाम बहुत
जान सस्ती बना रहा हूँ मैं

ढोंग है ये मिरी नई उल्फ़त
अब भी वा'दा निभा रहा हूँ मैं

बात मनहूस इक सुनाने को
पहले अच्छी सुना रहा हूँ मैं

ईद दीवाली हो कि बैसाखी
जश्न-ए-उर्दू मना रहा हूँ मैं

तंग आया हटा के काँटों को
अब तो रस्ता हटा रहा हूँ मैं

अब तो देते नहीं ग़ुलामी भी
दौर था इक ख़ुदा रहा हूँ मैं

आग लगने की चाह से ही तो
शम्अ' घर में जला रहा हूँ मैं

अब तिरा ज़हर फैले बाहर भी
अब तो 'मग़्लूब' जा रहा हूँ मैं
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Om Bhutkar Maghloob