साँस लेने का हुनर भी है ज़रूरी
ज़िंदगी में इक शजर भी है ज़रूरी
इश्क़ में जो भाग जाते रात में हैं
भूल बैठे वो बसर भी है ज़रूरी
फ़ाएदा कुछ भी नहीं है बोलने से
शख़्स पे होना असर भी है ज़रूरी
सूख जाते चेहरे ज़्यादा चाहने में
अब मुहब्बत में क़दर भी है ज़रूरी
— Ganesh gorakhpuri















