तीर का तेरे निशाना आ गया
सामने तेरा दिवाना आ गया
ये मोहब्बत का असर भी खूब है
नफरतों को सर झुकाना आ गया
हो गया मुझ को भी हासिल ये हुनर
पत्थरों में गुल खिलाना आ गया
देख कर अब मुस्कुरा देता है वो
दिल उसे भी अब चुराना आ गया
वो अदब से पेश भी आने लगे
प्यार उन को भी निभाना आ गया
ठोकरें खा कर मुझे भी दोस्तों
राह पर चलना चलाना आ गया
जब से आदत सोचने की छोड़ दी
फिर ज़फर को मुस्कुराना आ गया
— Zafar Siddqui















