जिसदिनमेरेदेसकीमिट्टी
कोमलमिट्टी
पत्थरबनकर
महलोंऔरक़िलओंकेरूपमेंढलजाएगी
उसदिनगंदुमजलजाएगी
जिसदिनमेरेदेसकेदरियाओंकापानी
ठंडापानी
बिजलीबनकर
शहरोंकीकालीरातोंकीज़ीनतकासामानबनेगा
उसदिनचाँदपिघलजाएगा
जिसदिनमेरेदेसकीहल्कीतेज़हवाएँ
इंसानोंकेख़ूनसेभरजाएँगी
जिसदिनखेतोंकीख़ामोशी
बोझलधातकीआवाज़ोंमेंखोजाएगी
उसदिनसूरजबुझजाएगा
जीवनकीपगडंडीउसदिनसोजाएगी