शाह से छुपके कैदी ने शहज़ादी को पैगाम लिखा
जंग से भागने वालों में शहज़ादे का भी नाम लिखा
दूरदराज़ से आने वाले ख़त मेरी हम सेाही के थे
इक दिन उसने हिम्मत करके अपना असली नाम लिखा
हम दोनों ने अपने अपने दीन पे क़ाएम रहना था
घर की इक दीवार पे अल्लाह इक दीवार पे राम लिखा
एक मोहब्बत खत्म हुई तो दूसरी की तैयारी की
नई कहानी के आगाज में पहली का अंजाम लिखा
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