हुआ जीना बड़ा मुश्किल हमारा
जो रहबर है वही क़ातिल हमारा
दरारें पड़ गई ना दोस्ती में
जलन कब झेल पाया दिल हमारा
दग़ाबाज़ी की बू थी मुख़बरी में
कोई तो यार था शामिल हमारा
बताओ ना कि कब लौटा रही हो
चुरा कर ले गई जो दिल हमारा
जब उस की इक नज़र हम पर पड़ी तो
सितारा हो गया नाज़िल हमारा
हमारे हिस्से की ख़ुशियाँ तुम्हारी
तुम्हारा दुख है अब हासिल हमारा
हम अपने गुज़रे कल से पूछते हैं
बिगाड़ा क्यूँँ ये मुस्तकबिल हमारा
हमें पंखे से लटकाने की चाहत
बहुत करता है दिल बुज़दिल हमारा
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