सदके न जाएँ हम तेरे इस एहतिमाम पर
नज़रें जमा के बैठे हैं दो एक जाम पर
जो ख़ास महफ़िलों का भी मेहमान-ए-ख़ास है
वो शे'र कह रहा है किसी मुझ से आम पर
नफ़रत के बदले प्यार मुझे दे रहा है तू
मैं मुस्कुरा रहा हूँ तेरे इंतकाम पर
मुझ को लगा था उठ के गले से लगेंगे आप
हैरत ज़दा हैं आप तो मेरे सलाम पर
उन सेे कहो सफ़र से नहीं रोकते तुम्हें
बातें सुना रहे हैं जो मेरे क़याम पर
Read Full