हुस्न की नक्ल-मकानी से मर जाते हैं
हम कितनी आसानी से मर जाते हैं
कुछ मर जाते हैं उस की आमद भर से
और बाक़ी हैरानी से मर जाते हैं
अपनी मौत को रोने-गाने वाले लोग
वक़्त की आना-कानी से मर जाते हैं
क़ुदरत ने क्या सोच रखा है दुनिया का
सारे प्यासे पानी से मर जाते हैं
इतना बोझ बढ़ाता है ऊला मिसरा
सुनने वाले सानी से मर जाते हैं
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