इतनी बेचैनियाँ हैं इस मन में
रूह घबरा रही है अब तन में
शोर बढ़ने लगा है धड़कन का
दर्द क्यूँँ चीख़ता है धड़कन में
एक तुम ही न मिल सके हम को
और तो सब मिला है जीवन में
पेड़ होते थे पहले, लेकिन अब
कुछ दीवारें उगी हैं आंगन में
आई मुद्दत के बाद लब पे हंसी
आई मुद्दत में नींद नैनन में
सोहबतें अपना क्या बिगाड़ेंगी
सांप पलते हैं ख़ूब चंदन में
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