phir na j | फिर न जाना हो तो आ सकते हो

  - Aqib khan

फिर न जाना हो तो आ सकते हो
सच में आना हो तो आ सकते हो

तुम मिरा ग़म तो बाँटने से रहे
दिल दुखाना हो तो आ सकते हो

मेरा मुझ में रहा नहीं कुछ भी
कुछ न पाना हो तो आ सकते हो

मैं कोई राज़ खोलता ही नहीं
कुछ बताना हो तो आ सकते हो

ऐसे कैसे तुम्हें मैं आने दूँ?
कुछ बहाना हो तो आ सकते हो

इक निशाँ आपका बचा हुआ है
वो मिटाना हो तो आ सकते हो

क्यूँ दलीलें रईसज़ादा सुने
गिड़गिड़ाना हो तो आ सकते हो

मैं भी अब हो गया तुम्हारी तरह
आज़माना हो तो आ सकते हो

  - Aqib khan

Dard Shayari

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