तुम्हारे साथ तो अब क़ाफ़िले हैं
मगर हम आज भी तन्हा खड़े हैं
कभी बाद-ए-सबास पूछना ये
तेरी यादों में कितना जागते हैं
तुम्हारा "आप" कहना खल रहा है
हमारे बीच कितने फ़ासले हैं?
कहीं भी दिल नहीं लगता हमारा
तेरे बारे में इतना सोचते हैं
तवक़्क़ो ग़ैर से क्या? जब दुखों में
हमारे अपने जुमले कस रहे हैं
बचो शीरीं ज़बाँ वालों से यारों
फँसाने के सभी ये चोचले हैं
वहाँ अब जा रहा हूँ यार अंकित
जहाँ कुछ लोग मुझ को जानते हैं
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