अरे कैसों के आगे रो रहे हो
अमाँ बहरों के आगे रो रहे हो
ज़रा कहने से पहले हाल जानो
वो जो रोतों के आगे रो रहे हो
वकालत सच की तुम तो कर रहे हो
मगर झूठों के आगे रो रहे हो
यही जीवन का अंतिम सत्य भी है
तो क्यूँ लाशों के आगे रो रहे हो
चले आए हो तो अर्ज़ी लगा लो
मगर भूखों के आगे रो रहे हो
इसे जब हाथ का ही मैल समझा
तो क्यूँ पैसों के आगे रो रहे हो
— Ankit gupta















