ghanto ek tasveer ko padhna hota hai | घंटो एक तस्वीर को पढ़ना होता है

  - Shadab Asghar

घंटो एक तस्वीर को पढ़ना होता है
तब जाकर के ग़ज़ल का मतला होता है

जब से उसने पा ए नाज़ुक धोये हैं
तब से झील का पानी मीठा होता है

सब कहतें हैं तुझ को मुझ से प्यार नहीं
उनका बोला हर कुछ सच्चा होता है!?

ज़िस्म किनारे रख कर मुझ सेे मिलने आ
'इश्क़ में ज़िस्म का मतलब ही क्या होता है

चार बरस के बाद समझ आया इक दिन
जो होता है बिल्कुल अच्छा होता है

अक्सर मैं ये इस सोच में गुम हो जाता हूँ
प्यार में कोई इतना अंधा होता है

तुझको ये मालूम मेरी जान ए जानां
तेरे शहर में मेरा चर्चा होता है

मैंने तो बस उस से दिल की बात कही
फिर जाना कि अक़्ल का अंधा होता है

आप वहीं है जिसने मुझ को छोड़ा था
जी बतलाएं पछतावा क्या होता है

सोने चाँदी से अफ़ज़ल है सच का साथ
एक दफ़ा इक लक्कड़हारा होता है

  - Shadab Asghar

Shehar Shayari

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