ये मुहब्बत रब का इक इल्हाम है
अब मगर इस काम में कोहराम है
प्रेम में गर कृष्ण एक अंजाम है
इश्क़ का इक नाम भी इस्लाम है
इंक़लाबी बोल से सीना भरो
राख़ होना जंग में इकराम है
गर हुक़ूमत ताज से गूंगे बने
तो हक़ीक़त बोलती आवाम है
बाँस बंसी देख कर कहते रहे
उस मुई के पास तो वो श्याम है
हम किसी अनपढ़ से ये सुनते रहे
इश्क़ करना हीं रहीम-ओ-राम है
— Happy Srivastava 'Ambar'















