तैरना भूल गया सागर में
नीमजाँ नाज़ हुआ बिस्तर में
नारसा मर्द फ़ज़ा तक क़ाबिल
बारहा रात कटा पत्थर में
गुफ़्तगू और नहीं वहमन से
सब वफ़ा पीर दवा परवर में
हम यहीं दूद क़ज़ा पे ग़ाफ़िल
और सब होंगे कता अख्तर में
ऐश है औज है महफ़िल अब
बिक रहा रास्त यहाँ सर सर में
बे-कफ़न लाश रहा हूँ कुनू
थूके है ख़ून निता ख़ंजर में
— Kunu















