नइ फ़िज़ाओं की बुलंदी में परवाज़ चाहता है
वो बच्चा बिना परों के ही आगाज़ चाहता है
गाँव के हालात ने परेशान कर रखा है उसे
नए शहरों की तरफ़ अब उड़ान चाहता है
माँ की ममता ने रोक रखा है उस को
बाप के ग़ुस्से से कहीं दूर जाना चाहता है
अपनी बीवी की बातों में आ कर वो भी मिर्ज़ा
बड़े भाई के नक़्शे क़दम पर जाना चाहता है
— Mirza















