behuda se bade bekar maani dekar | बेहुदास बड़े बेकार मआनी देकर

  - Amaan mirza

बेहुदास बड़े बेकार मआनी देकर
फिर चले ही गए सब अपनी सफाई देकर

पहले पहले तो लगा मुझको भी नाटक जैसा
मुब्तला कर गया मुझको वो कहानी देकर

कौन करता है यहाँ मुफ्त में सेवा किसी की
लोग फोटो भी खिंचाते हैं रज़ाई देकर

उसके आने से मुकम्मल हुई खुशियाँ जिसकी
वो भी रोने लगा बेटी को विदाई देकर

चंद पैसे ही मिले थे फ़कत उसको जिसने
काम पूरा किया था झूठी गवाही देकर

तुम भी आज़ाद हो तुमको भी इजाज़त है मिरी
चले जाओ मुझे तुम मुश्किलें सारी देकर

  - Amaan mirza

Ijazat Shayari

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