“हालत ए हाल”

तुम ने मुझ से पूछा है मेरा हाल कैसा है
क्या बताऊँ मैं तुम को जब से उस ने छोड़ा है
मेरी बात को सुनना और उस पे कुछ कहना
तब से हाल ऐसा है रोज़ ख़ुद से कहता हूँ
उस को भूल जाऊँगा
मैं भी एक दिन फिर से खुल के मुस्कुराऊँगा

इस से पहले भी मैं ने कितने लोग खोए हैं
इस से पहले भी मेरा हाल ऐसे बिगड़ा था
इस से पहले भी मेरा दिल कि ऐसे उजड़ा था
देखो उन की यादों में अब कहाँ मैं रोता हूँ

बात कुछ दिनों की है वो भी कल नहीं होगी
ग़म भी कल नहीं होगा सब सही सही होगा

एक दरिया यूँ भी तो इक तरफ़ नहीं बहता
एक वक़्त यूँ भी तो देर तक नहीं रहता

दिल तो मेरा करता है उस से पूछ लूँ जा कर
या वो बोल दे आ कर दोस्ती सलामत है
ख़ैर ये नहीं होगा ये भी जानता हूँ मैं
और दुख इसी का है

एक बात बतलाऊँ वो जो लोग कहते हैं
लड़कियाँ वफ़ाओं से वास्ता नहीं रखतीं
लड़कियाँ मोहब्बत से राब्ता नहीं रखतीं
वो जो लोग कहते हैं बेवफाएं होती हैं
वो जो तंज करते हैं लड़कियों की उल्फत पे
और उन की फ़ितरत पे
उन की बात मत सुनना वो न झूठ कहते हैं

मेरे साथ हो ना हो लेकिन अब भी कहता हूँ
वो वफ़ा की मूरत है वो हया की शिद्दत है

उस ने जो किया होगा सोच कर किया होगा
हाँ यही तो होता है लड़कियाँ जो करती हैं
सोच कर ही करती हैं

उस ने जो भी चाहा था उस ने जो भी माँगा था
मैं उसे न दे पाया उस ने क्या ही माँगा था
बस उसे समझ लूँ मैं उस को मान लूँ अपना
मुझ से ये न हो पाया
मुझ से हाथ फैला कर उस ने मुझ को माँगा था
मैं उसे न दे पाया

तुम तो जानते ही हो मैं तो ज़िन्दगी भर के
रब्त कब बनाता हूँ
तुम तो जानते ही हो मैं किसी के होने का
अहद कब निभाता हूँ

मेरी सोच जो भी हो इस से उस को क्या लेना
उस का हाल जो भी हो मुझ को इस से क्या मतलब

कल तो जाने क्या होगा आज लेकिन ऐसा है
आज दर्द होता है
तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने
अपने सारे ज़ख़्मों को लो दिखा दिया मैं ने

लेकिन उस के ज़ख़्मों कौन देखता होगा
मुझ से दूर हो कर के उस का हाल कैसा है
कौन पूछता होगा

मेरे दोस्त हो न तुम एक काम कर दोगे
वो अगर मिले तुम को लौटती जो दफ़्तर से
उस को रोक लेना तुम उस से पूछ लेना तुम
उस का हाल कैसा है

— Praveen Sharma SHAJAR

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