बस मिली ख़ामोशियाँ कुछ और तो पाया नहीं
ख़ैर जितना भी मिला सो वो भी तो ज़ाया' नहीं
रुक गई बातें लबों पर और फिर कुछ यूँ हुआ
उम्र भर इज़हार का लम्हा कभी आया नहीं
दूर भी होते गए तो मान ली मजबूरियाँ
वो कभी समझी नहीं और मैं ने समझाया नहीं
— Ravi 'VEER'
ख़ैर जितना भी मिला सो वो भी तो ज़ाया' नहीं
रुक गई बातें लबों पर और फिर कुछ यूँ हुआ
उम्र भर इज़हार का लम्हा कभी आया नहीं
दूर भी होते गए तो मान ली मजबूरियाँ
वो कभी समझी नहीं और मैं ने समझाया नहीं
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