वक़्त की लहरें उड़ा कर कश्तियाँ ले जाएँगी

और जो कुछ भी बचेगा आँधियाँ ले जाएँगी

दोस्तों के भेस में दुश्मन ही मिलते जाएँ तो
फिर यक़ीनन मौत तक ये यारियाँ ले जाएँगी

हुस्न पर इतना गुमाँ अच्छा नहीं है देखना
एक दिन सारी जवानी झुर्रियाँ ले जाएँगी

आप को जन्नत दिलाएगा यहाँ बेटा मगर
ग़ैरत-ए-जन्नत में केवल बेटियाँ ले जाएँगी

जुर्म में शामिल रहेंगे खिड़कियाँ दीवार छत
और फिर औरत की अस्मत कुंडियाँ ले जाएँगी

है अभी बचपन उड़ा लो मौज वर्ना एक दिन
इज़्तिराब-ए-'उम्र सारी मस्तियाँ ले जाएँगी

— Ravi 'VEER'

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