ittefaaqan naam tera soch kar rone lage | इत्तेफ़ाकन नाम तेरा सोच कर रोने लगे

  - Ravi 'VEER'

इत्तेफ़ाकन नाम तेरा सोच कर रोने लगे
सोचकर अब तू नहीं है दर-ब-दर रोने लगे

ठीक है नाराज़गी पर ये न हो जाए कहीं
ग़ैर के शाने तुम्हारा हम-सफ़र रोने लगे

आप क्यूँ है यूँ परेशाँ देख कर हमको यहाँ
हम ही पागल जो यहाँ शाम-ओ-सहर रोने लगे

इस फ़रेबी से जहाँ में ढूँढ लो तुम भी कोई
जो तुम्हारे आँसुओं को देख-कर रोने लगे

शाम होते ही परिंदे घर तो लौट आए मगर
आशियाना खो गया तो फूट-कर रोने लगे

सोचकर चुप हो गए हम एक घर अपना भी है
किस तरह चल पाएगा वो, हम अगर रोने लगे

मुस्कुराकर कह रहे थे ठीक हो जाऊँगा मैं
और फिर मुँह फेरकर वे चारागर रोने लगे

लौट कर आए तो जाना वो यहाँ से जा चुकी
जब सुनी हमने गली में ये ख़बर, रोने लगे

'वीर' मुश्किल है यहाँ मिलना की ऐसा शख़्स जो
तुम इधर रोने लगो तो वो उधर रोने लगे

  - Ravi 'VEER'

Akhbaar Shayari

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