खेल खेलना छोड़ो ज़ेर हो चुकी है अबज़ीस्त मौत के आगे ढ़ेर हो चुकी है अबज़िंदगी ये जो मेरी रुक्न होती थी पहलेज़िंदगी वो ही मेरी शे'र हो चुकी है अबजाने कब ये ढह जाए ख़ुद-कुशी के झोंके सेज़िंदगी पुरानी मुंडेर हो चुकी है अबथोड़ी देर पहले तक जाने देता मैं तुझ कोजाने वाले जाने में देर हो चुकी है अब— Saahir