तुम ने हमें भुला दिया अच्छा किया

अहल-ए-सुख़न बना दिया अच्छा किया

तुम दूर जा रहे ख़बर अच्छी नहीं
लेकिन हमें बता दिया अच्छा किया

हम को यक़ीन था तुम्हारे साथ पर
तुम ने भी मशवरा दिया अच्छा किया

पंछी क़फ़स में क़ैद था कुछ सोच के
तुम ने अगर उड़ा दिया अच्छा किया

ख़त दे दिया तुम्हें मगर बेचैन हूँ
पढ़ कर अगर जला दिया अच्छा किया

पहले सुकून से किया इज़हार पर
इक शोर भी मचा दिया अच्छा किया

— SHABAN NAZIR

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