दिल के ज़ख़्मों को इंदिमाल नहीं
फिर भी मैं दर्द से निढाल नहीं
हम ने जब कह दिया कि हाँ तो हाँ
अब नहीं का कोई सवाल नहीं
सिर्फ़ ख़ुशियाँ ही ज़द पे आती हैं
रंज-ओ-ग़म पर मिरे ज़वाल नहीं
उस की सूरत कई से मिलती है
उस की सीरत की ही मिसाल नहीं
मुझ को वादों पे टाल देते हो
क्या तुम्हें कुछ मिरा ख़याल नहीं
— Shadab Shabbiri















