dil ye kahtaa hai shajar aage badho | दिल ये कहता है शजर आगे बढ़ो

  - Shajar Abbas

दिल ये कहता है शजर आगे बढ़ो
ख़ाक डालो 'इश्क़ पर आगे बढ़ो

दर्द वहशत रंज यादें सख़्तियाँ
पीछे सब कुछ छोड़कर आगे बढ़ो

बाँध कर सर से मुहब्बत का कफ़न
साथ मेरे हम सफ़र आगे बढ़ो

मैं तुम्हें दस्तार देने से रहा
काट लो तुम मेरा सर आगे बढ़ो

कब तलक बे घर रहोगे इस तरह
दिल में मेरे कर लो घर आगे बढ़ो

मिस्ल-ए-हिन्दा 'इश्क़ के मैदान में
चाब लो मेरा जिगर आगे बढ़ो

दीद करनी है अगर महताब की
अहल-ए-दिल अहल-ए-नज़र आगे बढ़ो

  - Shajar Abbas

Deedar Shayari

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