hua hai hijr ka kaisa asar ye jee nahin lagta | हुआ है हिज्र का कैसा असर ये जी नहीं लगता

  - Shajar Abbas

हुआ है हिज्र का कैसा असर ये जी नहीं लगता
हमेशा जी लगाते हैं मगर ये जी नहीं लगता

ये नौहा पढ़ रहा है इक फ़िराक़-ए-यार का मारा
बड़े आराम से होते अगर ये जी नहीं लगता

तुम्हारी याद से रौशन है दिल की हर गली देखो
तुम्हारे बाद लेकिन लम्हा भर ये जी नहीं लगता

ये फ़ुर्क़त रंज ग़म रुसवाई हिजरत हिज्र तन्हाई
हैं हम पर ये सभी दौलत मगर ये जी नहीं लगता

फ़िराक़-ए-यार जब से हो गया इस सोच में हैं हम
करें तो क्या करें आख़िर शजर ये जी नहीं लगता

  - Shajar Abbas

Gham Shayari

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