तू कर रहा है शरारत कहूँ तो किस से कहूँ
बदल रहा है मुहब्बत कहूँ तो किस से कहूँ
हुआ है ख़्वाब हक़ीक़त कहूँ तो किस से कहूँ
वो कर गया है बग़ावत कहूँ तो किस से कहूँ
वतन में तेरे सभी यार मुंतज़िर हैं तिरे
तू पा चुका है शहादत कहूँ तो किस से कहूँ
जहाँ में 'इश्क़ को सब ज़िंदगी समझने लगे
मगर है 'इश्क़ अज़िय्यत कहूँ तो किस से कहूँ
तुम्हारे शहर में सब लोग बेवफ़ा हैं शजर
वफ़ा है मेरी ज़रूरत कहूँ तो किस से कहूँ
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