tu kar raha hai sharaarat kahooñ to kis se kahooñ | तू कर रहा है शरारत कहूँ तो किस से कहूँ

  - Shajar Abbas

तू कर रहा है शरारत कहूँ तो किस से कहूँ
बदल रहा है मुहब्बत कहूँ तो किस से कहूँ

हुआ है ख़्वाब हक़ीक़त कहूँ तो किस से कहूँ
वो कर गया है बग़ावत कहूँ तो किस से कहूँ

वतन में तेरे सभी यार मुंतज़िर हैं तिरे
तू पा चुका है शहादत कहूँ तो किस से कहूँ

जहाँ में 'इश्क़ को सब ज़िंदगी समझने लगे
मगर है 'इश्क़ अज़िय्यत कहूँ तो किस से कहूँ

तुम्हारे शहर में सब लोग बेवफ़ा हैं शजर
वफ़ा है मेरी ज़रूरत कहूँ तो किस से कहूँ

  - Shajar Abbas

Sach Shayari

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