तक़्सीम हूँ मैं अपनी ही तस्वीर से, ऐ दिल
हैरत न हो क्यूँ ज़ीस्त की तक़रीर से, ऐ दिल
'अर्से से नहीं गुज़रा तिरे शहर से हो कर
डरता हूँ न मर जाए कहीं तीर से, ऐ दिल
इक रात सी ये उम्र गुज़रने को लगी है
वो लूट गया झूठ की तश्हीर से, ऐ दिल
किरदार से मत पूछ कहानी के अलम को
मारा गया है, अपनी ही तहरीर से, ऐ दिल
हर नक़्श जो ता'मीर है, फ़रियाद का उस की
बिछड़ा हूँ, मैं हालात के तनवीर से, ऐ दिल
बैठा हूँ जहाँ, आग लगा कर ही उठा हूँ
है ख़ौफ़ मुझे मौत की ता'ज़ीर से, ऐ दिल
डूबा हूँ किनारे पे किनारे के भरम में
सो पाँव को कसता हूँ मैं ज़ंजीर से, ऐ दिल
मैख़ाने में अब जाम छलकता ही नहीं है
शिव नाम तो बदनाम है तज़्वीर से, ऐ दिल















