ग़मों से जब था मैं दो चार तब कहाँ थे तुम
नहीं था जब कोई ग़म-ख़वार तब कहाँ थे तुम
ख़ुदा के फ़ज़ल से सब कुछ है अब हमें हासिल
न कुछ था जब तो मेरे यार तब कहाँ थे तुम
पुकारते थे मुझे सब तुम्हारा आशिक़ जब
सड़क पे चलना था दुश्वार तब कहाँ थे तुम
जहाँ में इश्क़ की क़ीमत ही अब नहीं कोई
था गर्म जब के ये बाज़ार तब कहाँ थे तुम
ज़बाँ को जकड़ा है मेरी तुम्हारी फ़ुर्क़त ने
यही कहूँगा मैं हर बार तब कहाँ थे तुम
चले गए थे मुझे छोड़ कर सभी तन्हा
नहीं था कोई मददगार तब कहाँ थे तुम
कहा है मुझ से मेरे दिल ने आज ये तलहा
हुआ था जब के मुझे प्यार तब कहाँ थे तुम
— Talha Lakhnavi















