तिरी बाँहों में आना चाहता हूँ
मैं दिल का चैन पाना चाहता हूँ
तमन्ना है तू फिर इक बार रूठे
मैं फिर तुझ को मनाना चाहता हूँ
ज़रा ज़ुल्फ़ों को अपनी खोल दो तुम
मैं फिर मौसम सुहाना चाहता हूँ
तुम्हारे साथ जो मैं ने किया था
वो हर वा'दा निभाना चाहता हूँ
बिछड़ कर मुझ से जो ग़मगीं है तलहा
मैं अब उस को हँसाना चाहता हूँ
— Talha Lakhnavi















