भले पास उस के किनारा नहीं है

मगर फिर भी हिम्मत वो हारा नहीं है

दुखों में दिया साथ जिस ने तुम्हारा
सुखों में उसे क्यूँ पुकारा नहीं है

सजा ग़लतियों की मिली है ये तुम को
ज़रा दोष इस
में हमारा नहीं है

सुखों की करें आस किस से बताओ
किसी ने दुखों से उबारा नहीं है

दिए जिस को हम ने कई बार मौक़े'
उसी मौत ने हम को मारा नहीं है

चमक अपनी खो कर गिरा है जो नीचे
वो अब आसमाँ का सितारा नहीं है

पराए से लगने लगे लोग 'गुलशन'
कहीं पहले सा भाई चारा नहीं है

— Gulshan

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