ज़िन्दगी भर दिया तू ने ग़म ज़िन्दगी

बंद कर अब तो करना सितम ज़िन्दगी

तेरे बारे में जब सोचता हूँ तो क्यूँ
कोर पलकों की होती है नम ज़िन्दगी

उस का दामन सराबोर ख़ुशियों से है
जिस बशर पे है रब का क़रम ज़िन्दगी

पूरी करने को तेरी ज़रूरत यहाँ
रोज़ मर मर के जीते हैं हम ज़िन्दगी

अपनी मनमानियों को चलाते हुए
नाक में सबके करती है दम ज़िन्दगी

दुख के लम्हों में 'गुलशन' ज़ियादा लगे
सुख के लम्हों में लगती है कम ज़िन्दगी

— Gulshan

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