कोई चेहरा निगाहों को भा जाएगा
ज़िन्दगी ख़ूब-सूरत बना जाएगा
लाख पहरे बिठा कर रखो तुम मगर
इश्क़ चुपके से दिल में समा जाएगा
बख़्श देगा पराया तेरी जाँ मगर
कोई अपना ही दे कर दग़ा जाएगा
क्या रुकेंगी सियासत की मनमानियाँ
यूँ ही ख़ामोश जब तक रहा जाएगा
क्या पता था कोई आ के यूँ ज़ीस्त में
नींद आँखों से 'गुल' की उड़ा जाएगा
— Gulshan















