नहीं हैरत मोहब्बत में बदन को तुम मसल डालो
मेरी मानो मचलते दिल को तुम अपने कुचल डालो
घरों में लड़कियाँ अपनी जो तुम सब क़ैद रखते हो
मेरी मानो बुरी ये इक रिवायत है बदल डालो
के जिन के बीच है झगड़ा उसे वो ही भला जाने
मेरी मानो किसी के बीच में तुम मत ख़लल डालो
सभी तुम मस'अले अपने ख़ुदा पे छोड़ बैठे हो
मेरी मानो इबादत ऐसी तुम अपनी बदल डालो
मिटा के अब गुलिस्ताँ जो चले हैं चाँद पे बसने
मेरी मानो सभी ये ख़्वाहिशें उनकी कुचल डालो
बिना सोचे ख़ुदा पे वक़्फ़ अपनी ज़िन्दगी कर दी
मेरी मानो ये ऐसी बंदगी अपनी बदल डालो
भला क्या ख़ाक पढ़ पाओगे ये मोटी किताबें तुम
मेरी मानो सिलेबस में मेरी लिक्खी गज़ल डालो
चलो भी अब निकल आओ नया इक दौर लाना है
मेरी मानो ज़रूरत है ज़माना अब बदल डालो
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