मेरी ज़मीन को इस आसमाँ ने लूट लिया
कि जैसे घर को किसी पासबाँ ने लूट लिया
मैं डाकूओं की क़फ़स से तो भाग आया मगर
मुझे शरीफ़ों के इक कारवाँ ने लूट लिया
हम ऐसे शख़्श थे जो लुट गए मुरव्वत में
हम ऐसे फूल जिसे बाग़बाँ ने लूट लिया
किसी के साथ मरासिम नहीं निभाता है
जहाँ के आगे जो आया जहाँ ने लूट लिया
— Mohammad Aquib Khan















